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जौनपुर। चौधी गांव में जो भ्रष्टाचार में लिप्त रहे, वही जांच अधिकारी बनाकर भेजे गए, वाह यह कैसी जांच

अभिषेक तिवारी रिपोर्टर पाली
जौनपुर। मड़ियाहूं विकासखंड के मलिकानपुर चौधी गांव में मनरेगा समेत अन्य कार्यों में भ्रष्टाचार की जांच करने वही अधिकारी पहुंचे जो खुद भ्रष्टाचार में लिप्त थे। ऐसे में भ्रष्टाचार की जांच क्या होगी यह खुद समझ सकते हैं जांच के नाम पर लीपापोती कर ब्लॉक के अधिकारी कर्मचारी ग्रामीणों के हो हल्ला मचाने पर चले गए।
माड़ियाहू विकास खंड के ग्राम सभा मालिकानपुर चौधी में गांव के विकास के विभिन्न योजनाओं में ग्रामीणों द्वारा भ्रष्टाचार की शिकायत पर मनरेगा डी सी के आदेशानुसार जाँच के नाम पर वही अधिकारी पहुंचे जो भ्रष्टाचार में खुद लिप्त रहे। जिले के अधिकारी ऐसे लोगों को जांच अधिकारी बना कर पूरे योजना को ही मजाक बना कर रख दिया। जिससे मालूम होता है कि जिले के अधिकारी खुद इस भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में कहीं न कहीं से संलिप्त हैं और मलाई खा रहे हैं।

जो भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हो वही जांच अधिकारी, यह कैसा मजाक
गांव में ब्लॉक अधिकारी नवीन यादव, शिव प्रकाश चौधरी, राणा कौशिक, इंद्रजीत पाल, जेई विमल यादव, कोपरेटिव विपिन यादव व सेक्रेटरी प्रणव भारती मलिकानपुर चौथी ग्राम सभा में विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किए गए थे। यह सभी जांच अधिकारी चौधी गांव में पहले से ही योजनाओं के कार्य कराने में इनका खुला योगदान रहा है।

गांव के विद्यालय पर बैठकर ही तीसरी नेत्रों से कर दिया जांच

बताते हैं कि यह जांच अधिकारी ग्राम सभा चौधी के प्राथमिक विद्यालय पर बैठकर मामले को एक से डेढ़ घंटे में पूरे भ्रष्टाचार की जांच को निपटाने के साथ मौजूदगी का वीडियो बनवाया और चले गए, लेकिन गांव में जाने की जहमत तक नहीं उठाई। इन अधिकारियों की तीसरी नेत्र इतनी तेज थी कि विद्यालय के प्रांगण में ही बैठकर नाली, खड़ंजा, सोलर पैनल एवं मनरेगा द्वारा कराए गए कार्य को अपनी तीसरी नजर से देखकर पूरे मामले को क्लीन चिट दे दिया। ग्रामीण मौके पर चलने के लिए कहते रहे लेकिन अधिकारी जांच का सही भरोसा दिलाते रहे।

योगी है तो सब कुछ मुमकिन है भ्रष्टाचारी ही जांच अधिकारी
जब ग्रामीणों ने जांच अधिकारी से पूछा कि आखिर यह कैसा जांच है तो अधिकारियों ने कहा कि जांच निष्पक्षता के साथ किया जा रहा है। ग्रामीण यतेंद्र कुमार दुबे ने जांच अधिकारी में शामिल अधिकारी विपिन यादव से पूछा तो वह भड़क गए बोले जो मैं जांच कर रहा हूं वही सही है। ज्यादा बोलोगे तो ऐसी कलम चलाउंगा पूरे गांव में एक भी काम नहीं होगा।
हद तो तब हो गई जब शिकायतकर्ता अधिवक्ता सुनील सिंह के बुजुर्ग पिता आनंद बहादुर सिंह को जेई विमल यादव ने धमकी भरे लहजे मे कहा फर्जी टैग करके आप लोग शिकायत डाल रहे है जबकि गांव में किसी तरह का घोटाला हुआ ही नहीं है। अब शिकायत किया तो मान-हानि का दावा करवा दूंगा सारा पसीना उतर जाएगा।

जांच की उड़ाते रहे अधिकारी धज्जियां, नहीं गए गांव में
अधिवक्ता सुनील सिंह का कहना हैं कि गलत मापन -पुस्तिका बनाकर ग्रामीणों को भ्रमित करने का काम इन अधिकारियों ने किया है।उनके खिलाफ तो आवाज उठायेंगे।
मनरेगा के तहत महिलाओ को भी काम करवा कर अभी तक उनका जॉब कार्ड तक नहीं बनवाया गया। जब ग्रामीणों ने समतलीकरण के मुद्दे पर सवाल किया तो अधिकारी इधर उधर की पट्टी पढ़ाते नजर आये।
ग्रामीण जांच की सही पुष्टि करने के लिए पूछते रहे लेकिन कापरेटिव विपिन यादव ने कहा कि यह जांच हम लोगों की मर्जी की है चाहे जैसे करें, ग्रामीणों की कहने के अनुसार जांच नहीं होगी।
भ्रष्टाचारी अधिकारियों के जाने के बाद ग्रामीणों ने कहा मुख्यमंत्री योगी भ्रष्टाचार को मिटाने का चाहे जो भी संकल्प करें लेकिन अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार को खत्म होने नहीं देंगे और लोग भ्रष्टाचारियों को अपनी नंगी आंखों से भ्रष्टाचार करते देखते रहेंगे।

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