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जौनपुर। भक्त की रक्षा के लिए भगवान लेते है अवतार-कुमारी रुक्मिणी शास्त्री

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जौनपुर (22जन.)। सिकरारा विकास खण्ड के नेवढ़िया बरईपार गांव में श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा वाचक कुमारी रुक्मिणी शास्त्री जी ने आज की कथा में हिरण्यकश्यप व भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप अपने भाई की मौत का बदला भगवान विष्णु से लेने के लिए ब्रह्मा जी की तपस्या करने के लिए एक वट के नीचे बैठ गया। जहां देव गुरु वृहस्पति तोता का रूप धारण कर वृक्ष पर बैठ गए। और नारायण नाम का रट लगाने लगा। आजिज हिरण्यकश्यप तपस्या छोड़ कर घर आ गया। पत्‍‌नी ने पूछा कि आप तपस्या छोड़कर क्यों चले आए तो तोता की बात बताई। पत्‍‌नी ने भी भगवान के नाम का जप किया और गर्भ ठहर गया उसके बाद भक्त प्रहलाद के रूप में बालक का जन्म हुआ। जब प्रहलाद गुरुकुल से घर आए तो हिरण्यकश्यप ने पूछा कि क्या शिक्षा ग्रहण किए हो। प्रहलाद भगवान का गुणगान करने लगे। इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा और कहा कि तुम मेरे शत्रु का गुणगान कर रहे हो। लेकिन प्रहलाद ने भगवान की अराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप अत्याचार करता रहा और भगवान प्रहलाद को बचाते रहे। एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद से कहा कि तुम्हारे भगवान कहां हैं, प्रहलाद ने जवाब दिया कि कण-कण में हैं और इस खंभे में भी हैं। इतना सुनते ही हिरण्यकश्यप ने तलवार निकाल कर खंभे पर वार कर दिया। तब नरसिंह के रूप में भगवान प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध कर देते है।इस प्रकार पापी का बध करके भक्त का मान रखते है।

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